इंसान आजकल का वफादार नहीं है | मिलती उसे सजा जो गुनहगार नहीं है || ये जिंदगी मिली है तुझे चार दिनों की | बेकार जिंदगी है अगर प्यार नहीं है || इंसाफ का जमाना बदल आज गया है | अब झूठ और सच भी चमकदार नहीं है|| अब घर मकान भी ये हवादार बने है | पर आजकल झरोखे हवादार नहीं है || अब "सोनू" कह रहा है जरा देख गुजर के | ये सब है दिखावा कहीं भी प्यार नहीं है || ..........Dil se.....
तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते,,, एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते,,, क्या ख़ता थी के टूट गये हैं सब रिश्ते ,,, ये तो जाते हुए तुम मुझको बताते जाते,,, ना इख़लास कोई ना ही शिकायत कोई,,, कोई एहसान सही वो ही जताते जाते,,, संभलना कैसे है मुझको तेरे जाने के बाद,,, कम से कम ये हुनर भी तो मुझे बताते जाते,,,
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